उज्जैन, 19 सितंबर। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनसेवा की एक प्रेरणादायक कहानी तराना तहसील के ग्राम अनंतखेड़ी से सामने आई है।

मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले श्री दीपक एवं उनकी पत्नी श्रीमती माया बाई के छह माह के पुत्र रक्षित को गंभीर कुपोषण तथा सीवियर एनीमिया से मुक्त कर स्वस्थ बनाया गया है।

यह सफलता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तराना में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की समर्पित सेवा और परिवार के सहयोग का परिणाम है।

स्वास्थ्य खराब होने पर माता-पिता रक्षित को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तराना लेकर आए। चिकित्सकीय जांच में पाया गया कि आयु की तुलना में बालक का वजन अत्यंत कम—मात्र 4 किलो 370 ग्राम—था। रक्त की भारी कमी के साथ वह सीवियर एनीमिया एवं गंभीर कुपोषण से ग्रस्त था, जिसके कारण वह बार-बार बीमार रहता था और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा था। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में निरंतर दो सप्ताह का भर्ती उपचार दिए जाने पर रक्षित को कुपोषण एवं एनीमिया से मुक्त किया जा सकता है। चिकित्सकों की बातों से प्रेरित होकर माता-पिता ने बालक को भर्ती कराने की सहमति दे दी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल ने बताया कि रक्षित को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तराना के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर आवश्यक जांच एवं उपचार प्रारंभ किया गया। केंद्र में दो सप्ताह तक भर्ती रखकर गंभीर कुपोषण एवं सीवियर एनीमिया का पूर्ण प्रबंधन किया गया। चिकित्सक डॉ. ललित जांगीड़, पोषण प्रशिक्षक श्रीमती क्षमा यदुवंशी तथा पोषण पुनर्वास केंद्र के समस्त स्टाफ की निरंतर निगरानी एवं समुचित देखभाल के फलस्वरूप रक्षित कुपोषण से मुक्त हो सका। उपचार के दौरान उसका वजन बढ़कर 5 किलो 370 ग्राम हो गया तथा हीमोग्लोबिन भी सामान्य स्तर पर आ गया। स्वस्थ होने के पश्चात रक्षित को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

डिस्चार्ज के समय माता को घर पर निरंतर पोषण आहार बनाने एवं कुपोषण से बचाव के संबंध में विस्तृत परामर्श दिया गया, ताकि वजन और बढ़े तथा बालक तंदुरुस्त रहे। फॉलोअप के दौरान रक्षित का वजन 6 किलो 390 ग्राम पाया गया। भर्ती अवधि में रक्षित को पूर्ण उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। डिस्चार्ज के समय माता-पिता को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। रक्षित के माता-पिता अब इस बात से प्रसन्न हैं कि उनका पुत्र गंभीर कुपोषण एवं सीवियर एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति से मुक्त हो सका।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत यह प्रकरण इस बात का जीवंत उदाहरण है कि समय पर पहचान, निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण उपचार और परिवार के सहयोग से कुपोषण जैसी चुनौती पर विजय पाई जा सकती है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ऐसे प्रत्येक बच्चे तक सेवा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।