धार जिले के ग्राम राजोद में 100 से अधिक दुग्ध उत्पादकों ने स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन के व्यावहारिक तरीके सीखे। एक दिवसीय प्रशिक्षण में उन्हें दुग्ध सहकारिता, पशुपालकों के अधिकार एवं कर्तव्य और शासन की योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत जिला सहकारी संघ धार और इंदौर दुग्ध सहकारी संघ ने संयुक्त रूप से यह प्रशिक्षण आयोजित किया। इसमें आसपास की क्षेत्रीय दुग्ध सहकारी संस्थाओं के सदस्य शामिल हुए।
स्वच्छता से गुणवत्ता और बेहतर मूल्य पर जोर
इंदौर दुग्ध संघ के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक एन.के. पगारे ने दूध उत्पादन और संकलन के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के तरीके बताए। उन्होंने समझाया कि बेहतर गुणवत्ता से उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य मिलने में मदद मिलती है।
प्रशिक्षण में निजी बिचौलियों के बजाय दुग्ध सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दूध देने के लाभों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को शासन की वर्ष 2030 तक की रणनीतिक योजनाओं के बारे में बताया गया।
पशु किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी
सहकारी प्रशिक्षण केंद्र इंदौर के पूर्व प्राचार्य के.एल. राठौर ने बताया कि भारत विश्व के कुल दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है। उन्होंने पशुपालकों से पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना का अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।
इंदौर दुग्ध संघ के क्षेत्रीय प्रबंधक मोहन वास्केल ने पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के लिए संघ की योजनाओं व सुविधाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में साजोद दुग्ध सहकारी संस्था के अध्यक्ष दयाराम और राजोद दुग्ध संस्था के अध्यक्ष भारत लाल पटेल भी मौजूद रहे।
प्रशिक्षण के अंत में सदस्यों को दुग्ध सहकारिता संबंधी मार्गदर्शन निर्देशिका और बैग दिए गए। कार्यक्रम का संचालन जिला सहकारी संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शुभेन्द्र सिंह पवार ने किया और लक्ष्मी नारायण चावड़ा ने आभार व्यक्त किया।


