उज्जैन 19 सितंबर। मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में गत दिवस जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री श्रेयांश कुमट, एडिशनल एस पी श्री करनदीप सिंह ने ग्राम चिकली में प्राकृतिक खेती कर रहे कृषक के खेत का अवलोकन किया। उन्होंने खेत पर संचालित प्राकृतिक खेती यूनिट का निरीक्षण कर प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाली विभिन्न विधियों एवं जैविक इनपुट की जानकारी ली।
कृषक श्री वीरेंद्र सिंह आंजना ने बताया कि उनके द्वारा लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक/जैविक खेती की जा रही है। खेत में सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बैड विधि से की गई है। कृषक ने बताया कि इस पद्धति से तुलनात्मक रूप से बेहतर उत्पादन मिलता है।
खेत पर ही तैयार कर रहे जीवामृत और जैविक खाद
अवलोकन के दौरान कृषक ने जीवामृत, वेस्ट डीकंपोजर एवं दशपर्णी अर्क तैयार करने की विधियों तथा उनके उपयोग की जानकारी दी। कृषक द्वारा पशुपालन भी किया जा रहा है तथा पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग केंचुआ खाद तैयार करने में किया जा रहा है। तैयार खाद को स्वयं के खेत में उपयोग करने से बाहरी खाद पर होने वाला खर्च कम किया जा रहा है।
ग्राम बलेडी के कृषक श्री राजेश कुशवाह द्वारा की जा रही हल्दी प्रोसेसिंग एवं पाउडर निर्माण की प्रक्रिया का भी अवलोकन किया। इसके साथ ही पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत संचालित पापड़ उद्योग में तैयार किए जा रहे पापड़ का निरीक्षण किया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे नवाचार करने वाले किसानों एवं ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा अन्य किसानों को भी इन गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
प्राकृतिक खेती से स्वास्थ्य, मिट्टी और पर्यावरण को लाभ
इस अवसर पर उप संचालक कृषि श्री के.एस. कैन, उपसंचालक उद्यानिकी श्री के.एस. मंडलोई, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री धीरेन्द्र पाराशर, तहसीलदार श्री अनिल मोरे वरिष्ठ कृषि अधिकारी श्री जितेन्द्र सोलंकी सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
सहायक संचालक कृषि श्री कमलेश कुमार राठौर ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को निरंतर जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य, भूमि के स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण तथा कम लागत में खेती के उद्देश्य से किसान प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाएं और खेत पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें।