भोपाल के भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान का e-FARMS मिट्टी के आँकड़े, फसल और उपज-लक्ष्य को मिलाकर उर्वरक-सलाह देता है। संस्थान के अनुसार यह मध्य प्रदेश के लिए काम कर रहा है।
सोयाबीन, गेहूँ, मक्का और चना इसके प्रमुख विकल्प हैं। डिजिटल मृदा मानचित्र खेत के भीतर पोषक तत्वों का अंतर दिखाते हैं। प्रणाली को भरोसेमंद जाँच-आँकड़े और इंटरनेट चाहिए।
नमूना पूरे खेत की बात कहे
कृषि मंत्रालय की मृदा परीक्षण पुस्तिका नमूना लेते समय खेत में कई स्थान चुनने को कहती है। जिगजैग या डब्ल्यू आकार का रास्ता अलग हिस्सों की मिट्टी जुटाने में मदद करता है। सामान्य फसलों के लिए प्रायः 0–15 सेंटीमीटर की गहराई उपयुक्त बताई गई है; गहरी जड़ वाली फसलों में जरूरत अलग होगी।
नमूने साफ औजारों से लिए जाएँ। हर थैली पर स्थान, तारीख, गहराई और फसल का विवरण रहे। खाद डालने के तुरंत बाद नमूना लेने तथा पानी भरे या असामान्य हिस्से को पूरे खेत का प्रतिनिधि मानने से बचने की सलाह है। ये छोटे विवरण प्रयोगशाला में मिलने वाले परिणाम की व्याख्या बदलते हैं।
नमूना लेने का समय भी मायने रखता है। पुस्तिका बुवाई से पहले या खेत खाली रहने की अवधि चुनने को कहती है। जाँच तक नमूने साफ थैलियों में ठंडी, सूखी जगह रखें। मिट्टी को केवल देखकर पोषक तत्वों की कमी तय नहीं की जा सकती; उसके लिए परीक्षण जरूरी है।
भोपाल के खेत में परीक्षण
संस्थान ने अपने शोध फार्म के तीन स्थानों पर मक्का की उपज का लक्ष्य पाँच हजार किलो प्रति हेक्टेयर रखा। प्राप्त उपज 4,800, 4,400 और 5,400 किलो रही। औसत 4,867 किलो था। ये तीन स्थल के परिणाम हैं; अलग खेत की सिफारिश उसके अपने नमूने और उपलब्ध आँकड़ों से बनेगी।
मुख्य बातें
- पहला कदम: प्रतिनिधि मिट्टी का नमूना
- फसल और उपज-लक्ष्य से जुड़ी सलाह
स्रोत और संदर्भ
- भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल · e-FARMS: system and three-site field validation ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग · Soil Sampling & Testing Manual, classes 9–10 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



