होटल के मंच पर इंडिया टुडे का संवाद था, मिल का फर्श नहीं। 8 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, राज्य सरकार ने इंदौर में हुकुमचंद मिल के मजदूरों को 300 करोड़ रुपये दिलवाए, तीस साल पुराना विवाद खत्म हुआ। रतलाम की सज्जन मिल और ग्वालियर की मिल के लिए भी इसी तरह के प्रयास जारी हैं। वेतन इस वाक्य को वादा मानता है, उस शाम की रसीद नहीं।

आठ जनवरी 2024 को मंत्रालय में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों की भेंट की विज्ञप्ति अलग आँकड़ा देती है: 1992 में बंद हुई हुकुमचंद मिल के पाँच हजार से अधिक श्रमिकों को 224 करोड़ रुपये का भुगतान। दो विज्ञप्तियाँ, दो रकम। जुलाई का भाषण 300 करोड़ कहता है, जनवरी की भेंट 224 करोड़। वेतन दोनों पंक्तियाँ रखता है, उन्हें एक नहीं करता।

बाकी वाक्य मिल की पर्ची नहीं

उसी संवाद में टेक्सटाइल पार्क की लाड़ली बहनों को पाँच हजार रुपये अलग दिलाने और लाड़ली बहना की राशि क्रमबद्ध रूप से तीन हजार करने की बात है। एक लाख शासकीय पदों पर भर्ती, नौ साल से अटकी पदोन्नति—ये युवा और कर्मचारी के वाक्य हैं, मिल मजदूर की बकाया सूची नहीं। तस्वीर होटल बैठक की है।

मुख्य बातें

  • जुलाई 2025: हुकुमचंद 300 करोड़, 30 साल का विवाद खत्म—यह भाषण का वाक्य है।
  • जनवरी 2024: भारतीय मजदूर संघ की भेंट पर 224 करोड़ और पाँच हजार से अधिक श्रमिक।
  • रतलाम की सज्जन मिल और ग्वालियर की मिल पर “प्रयास जारी हैं”—भुगतान की सूची नहीं।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · हुकुमचंद मिल के समान, ग्वालियर-रतलाम के मिल मजदूरों को भी दिलाया जाएगा उनका हक ↗8 जुलाई 2025
  2. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने भेंट की ↗8 जनवरी 2024

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।

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