भोपाल के भारत भवन में वागर्थ केन्द्र भारतीय भाषाओं की कविता के साथ कवियों की पांडुलिपियाँ और उनके पाठ की आवाज़ें भी सँभालता है। रचना को पढ़ना और रचनाकार को बोलते सुनना—साहित्य को जानने के दोनों रास्ते यहाँ मिलते हैं।

भारत भवन के संस्थागत परिचय में पुस्तकालय में 13 हजार से अधिक पुस्तकों का उल्लेख है। इनमें भारतीय भाषाओं का काव्य, विदेशी कविता के अंग्रेज़ी अनुवाद, काव्यशास्त्र, आलोचना और संस्कृति की किताबें हैं। यह पुराने परिचय का आँकड़ा है।

किताब से आगे का संग्रह

अभिलेखागार में महत्वपूर्ण भारतीय कवियों के सैकड़ों ऑडियो और वीडियो पाठ दर्ज हैं। वागर्थ की गतिविधियों में अनुवाद कार्यशालाएँ, लेखक शिविर और साहित्यिक पत्रिकाओं को सहायता भी शामिल रही है। भवानीप्रसाद मिश्र, नागार्जुन, त्रिलोचन और विनोद कुमार शुक्ल जैसे लेखकों के पाठ इसकी स्मृति का हिस्सा हैं। इस तरह संग्रह के साथ लेखन और बातचीत की जगह भी बनती है।

इमारत में भी संवाद की जगह

चार्ल्स कोरिया फाउंडेशन का परियोजना विवरण बताता है कि झील की ओर उतरती पहाड़ी के स्वाभाविक उतार को सीढ़ीनुमा बगीचों और नीचे धँसे आँगनों में बदला गया। इन्हीं के आसपास कविता पुस्तकालय, आदिवासी कला संग्रहालय, समकालीन कला दीर्घाएँ और कार्यशालाएँ रखी गईं।

अंतरंग सभागार के साथ झील की ओर खुला बहिरंग रंगमंच है। ऊपर से आती रोशनी और आँगनों की ओर खुलते दरवाज़े भवन की बनावट का हिस्सा हैं। यहाँ साहित्य के लिए बनाया गया कमरा बाकी कलाओं से अलग-थलग नहीं पड़ता। वागर्थ को समझने का एक सिरा उसके संग्रह में है, दूसरा उस परिसर में जहाँ कविता, चित्र और रंगमंच एक-दूसरे के पड़ोस में रहते हैं।

मुख्य बातें

  • कविता, आलोचना और काव्यशास्त्र का संग्रह।
  • कवियों के पाठ की ऑडियो-वीडियो स्मृति।

स्रोत और संदर्भ

  1. भारत भवन · वागर्थ: भारतीय कविता केन्द्र ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. Charles Correa Foundation · Bharat Bhavan: Bhopal 1975–81 ↗23 फ़रवरी 2022

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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